भारत सरकार की कैबिनेट ने शुक्रवार को हाइजैक विरोधी क़ानून को और कड़ा कर दिया है. इस क़ानून में अब प्रवधान है कि विमानों अपहरण की कोशिश करने की सज़ा के तौर पर मृत्युदंड भी दिया जा सकता है.
कैबिनेट ने एंटी हाइजैकिंग लॉ में सुधार करने करने की स्वीकृति दे दी है. इसे और कड़ा कर दिया गया है. तय किया गया है कि प्लेन हाइजैक करने वाले को मौत की सज़ा भी दी जा सकती है. साथ ही यह भी तय हुआ है कि अगर ऐसा लगा कि विमान का अपहरण कर उसे किसी महत्वपूर्ण इमारत से टकराया जा सकता है, विमान को मिसाइल की तरह इस्तमाल किया जा सकता है तो उस विमान को शूट कर दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने 1982 के एंटी हाइजैकिंग लॉ में यह सुधार करने का फ़ैसला किया है.
गृहमंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व वाली एक समिति वर्तमान क़ानून में सुधार के लिए इन प्रस्तावों पर विचार कर रही थी साथ ही विमान अपहरण करने के षडयंत्र के बारे में भी चर्चा हुई. आतंकी हमलों के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए भारत की सरकार ने यह फ़ैसला किया है.
1982 के अधिनियम 4 में यह बदलाव किया गया है. पुराने क़ानून के हिसाब से विमान का अपहरण करने वालों को उम्रक़ैद की सज़ा का प्रावधान था. अब कैबिनेट इन सुधारों को संसद में रखेगी.
नए क़ानून के हिसाब से भारत की वायुसेना अपह्रत विमान या फिर उसके मिसाइल के तौर पर इस्तमाल किए जाने की सूरत में तेज़ी से फ़ैसला कर सकेगी. 1999 में एयर इंडिया की एक फ़्लाइट को पाकिस्तानी चरमपंथी गुट ने अग़वा कर लिया था. इस तरह की परिस्थिति से बचने के लिए कैबिनेट ने इस क़ानून को कड़ा किया है.
रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे