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ख़ास ख़बर

भारत को होगी हेडली से पूछताछ की इजाजत

अमेरिका ने कहा है कि भारत के जांचकर्ताओं को डेविड हेडली से पूछताछ की इजाजत होगी, लेकिन उसे भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा. हेडली मुंबई के आतंकवादी हमलों में शामिल होने की बात स्वीकार कर चुका है.

शुरू में आरोपों से इनकार करता था हेडली

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक से जब पूछा गया क्या भारतीय जांचकर्ताओं को हेडली से पूछताछ की इजाजत होगी, तो उन्होंने कहा, "हां." ब्लेक ने हेडली को भारत प्रत्यर्पित किए जाने से इनकार किया है लेकिन अभी इस बारे में विकल्प खुले रखे हैं. हो सकता है भविष्य पर उस पर भारत से जुड़े और आरोप लगें. उन्होंने कहा, "सौदेबाज़ी की याचिका में हुई सहमति के मुताबिक, अमेरिका हेडली को भारत, पाकिस्तान या फिर डेनमार्क प्रत्यर्पित नहीं करेगा. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि भविष्य में उसके ख़िलाफ़ और आरोप तय नहीं होंगे. लेकिन कम से कम इन आरोपों के आधार पर उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा."

कबूले सारे जुर्म

डेविड हेडली ने जब एक के बाद एक अपने सारे जुर्म कबूले तो उसने यह भी मान लिया कि वह विदेशी जांच एजेंसियों से पूछताछ के लिए तैयार हो जाएगा. हेडली के वकील जॉन थीस का कहना है कि माफी के लिए सौदेबाजी के दौरान हेडली ने यह माना है वह भारतीय अधिकारियों के सामने खुद को उपलब्ध कराएगा. लेकिन अभी भारत और अमेरिका को यह तय करना है कि यह काम कैसे किया जाएगा और क्या भारतीय अधिकारियों को हेडली से किसी भी तरह की पूछताछ की पूरी छूट होगी.

मुंबई हमलों में निशानी बनी जगहें

अमेरिका ने अब तक भारतीय एजेंसियों को डेविड हेडली से पूछताछ की इजाजत नहीं दी है और पिछले साल जब भारत की एक जांच टीम उससे जवाब तलब करने गई थी तो उसे ख़ाली हाथ लौटना पड़ा था. पर अब उसके वकील कहते हैं कि हेडली ने सच्चाई के साथ सभी बातों को बताने का संकल्प किया है.

डेविड हेडली ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ माफ़ी के लिए सौदेबाज़ी की है, जिसके तहत वह उन्हें आतंकवाद से जुड़ी बातें बताने को तैयार हो गया है और इसके बदले उसे मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी.

निराश होने की ज़रूरत नहीं

भारतीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भारत हेडली से निर्धारित वैधानिक तरीक़े से पूछताछ करने की अनुमित प्राप्त कर लेगा जिसमें उसे सहयोग करना होगा. अमेरिकी अटॉर्नी जनरल और न्याय विभाग के प्रमुख एरिक होल्डर के साथ टेलिफोन पर हुई बातचीत के बाद चिदंबरम ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें मुंबई हमलों की साज़िश से जुड़े मामले के सिलसिले में हेडली की सौदेबाज़ी याचिका से जुड़े तमाम पहलुओं की जानकारी दी गई है.

चिदंबरम का कहना है कि हेडली के कबूलनामे को भारत के लिए निराशा और झटका के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए

हेडली से होगी सही से पूछताछः चिदंबरम

और भारत हमेशा उसके प्रत्यर्पण की मांग करता रहेगा. हालांकि कबूलनामे की शर्त है कि हेडली को भारत, पाकिस्तान या डेनमार्क प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा. लेकिन इस शर्त के अंदर भी एक शर्त यह है कि ऐसा तब तक किया जाएगा, जब तक हेडली सच्चाई और ईमानदारी के साथ आतंकवादी घटनाओं में अपनी भूमिका के बारे में बताता रहेगा.

डेविड हेडली क़ानूनी तौर पर अमेरिका का नागरिक है और शायद अमेरिका भी अपने नागरिक को भारत या किसी और देश के हवाले नहीं करना चाहेगा. भारत को भी लगता है कि यह काम मुश्किल है क्योंकि हेडली ने अमेरिका में भी अपराध किए हैं. चिदंबरम कहते हैं कि भारत फिर भी उसे अपने देश लाने की कोशिश करता रहेगा.

पूरे सहयोग को तैयार

अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि हेडली इस बात को मान चुका है कि अमेरिकी अटॉर्नी जनरल की इजाजत से वह पूरी तौर पर किसी भी विदेशी जांच एजेंसी के सामने निजी तौर पर पेश होकर, वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से या पत्र व्यवहार से बयान दे सकता है. लेकिन उससे पूछताछ सिर्फ़ अमेरिकी धरती पर ही होगी.

हेडली 14 जनवरी को अपने सभी अपराधों से मुकर गया था लेकिन अचानक उसने पाला बदलते हुए 35 पन्नों की अर्ज़ी में खुद पर लगे सभी 12 आरोप स्वीकार कर लिए और जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया. इसके बदले उसे मौत की सजा से छुटकारा मिल गया है. हेडली के वकील थीस से जब पूछा गया कि क्या भारतीय एजेंसियां मुंबई हमलों के बारे में भी पूछताछ कर सकती हैं, तो उन्होंने कहा, "जी हां. अगर वह हमारे यहां रहते हुए विदेशी जांच एजेंसियों से बात करने से इनकार करेगा तो फिर इसे माफ़ी के सौदेबाज़ी की शर्तों को तोड़ना समझा जाएगा." अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर का कहना है कि हेडली आतंकवाद से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं दे रहा है.

हेडली ने अपने कबूलनामे में इस बात को स्वीकार किया है कि उसने पाकिस्तान के अंदर लश्कर ए तैयबा के ट्रेनिंग कैंपों में हिस्सा लिया और कई बार लश्कर के सदस्यों से मुलाक़ात की. भारत में रक्षा जानकारों का कहना है कि यह इस बात की पुष्टि करता है कि मुंबई हमले पूरी तरह से लश्कर के इशारों और उसकी देख रेख में किए गए.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः एस गौड़

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