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ताना बाना

जमात उद दावा ले रहा है फेसबुक का सहारा

मुंबई हमलों का आरोप झेल रहे जमात उद दावा और अल कायदा समर्थक सिपाह ए साहबा संगठन सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक और मुश्किल खड़ी कर रहे हैं. लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ये फेसबुक जैसी वेबसाइट का सहारा ले रहे हैं.

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट जैसे फेसबुक पर जमात उद दावा और अन्य चरमपंथी संगठन जो फोटो लगाते हैं उनमें चरमपंथियों को अत्याधुनिक हथियार लहराते देखा जा सकता है. सिपाह ए साहबा संगठन प्रतिबंधित सुन्नी इस्लामी संगठन है और उस पर खुले तौर पर शियाओं के खिलाफ भावनाएं भड़काने का आरोप लगता है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान में इन दोनों संगठनों पर कोई रोकटोक नहीं है.

भारत का कहना है कि 2008 में मुंबई हमलों के पीछे जमात उद दावा संगठन की ही साजिश थी. जमात उद दावा पर संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाया हुआ है. लेकिन जमात उद दावा खुद को राहत संस्था बताती है जो सिंध और पश्चिमोत्तर प्रांत में राहत कार्य में जुटी है. रिपोर्टों के मुताबिक इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों को जमात उद दावा ऑनलाइन संदेशों के जरिए गैरमुस्लिमों के खिलाफ हिंसा के लिए भड़का रहा है.

संगठन के फेसबुक पेज पर भारत विरोधी प्रचार किया गया है जिसमें कहा गया है कि पिछले साल लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हुए हमले के पीछे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का हाथ था.

पश्चिमी देशों को चिंता है कि इंटरनेट पर दुष्प्रचार के जरिए ये संगठन युवाओं पर गलत प्रभाव डाल रहे हैं. पाकिस्तान ने हाल के दिनों में सिपाह ए साहबा जैसे गुटों के खिलाफ सैन्य अभियान छेड़ा है लेकिन साइबर जगत में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है जिसके चलते वे अपनी गतिविधियां चला रहे हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा एम

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